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जाम्भाणी संस्कार शिविर 3

जाम्भाणी संस्कार शिविर 3 पंच दिवसीय कवि सम्मेलन की शुरुआत प्रथम दिवस में संत महात्मा व गुरुजन उपस्थित रहे । व मेरे छोटे बड़े भाई-बहनों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया। 🎉🎉Topic: ऑनलाइन जांभाणी संस्कार शिविर-03 (29-11-2020) Date: 29 Nov, 2020 (रविवार) Time: 03:45 PM India Link for Joining Zoom Meeting https://us02web.zoom.us/j/89462331482?pwd=UFlydktSdUxCcGM5OWNVbFYraUpZUT09 Zoom Meeting ID: 894 6233 1482 Zoom Passcode: 292929 कर्यक्रम फेसबुक पर भी लाइव रहेगा | अगर ज़ूम में जगह ना मिले तो क्रप्या फेसबुक पर जुड़ने का श्रम करें "       https://www.facebook.com/jambhani/ नोट:      1. क्रप्या सबसे पहले अपने मोबाइल में ज़ूम ऐप निम्न लिंक पर क्लिक डाउनलोड करके इनस्टॉल करें | अगर ज़ूम ऐप इनस्टॉल नही होगी तो आपका माईक चालू नही होगा |     https://play.google.com/store/apps/details?id=us.zoom.videomeetings    2. ज़ूम ऐप डाउनलोड होने के बाद निम्न लिंक कर क्लिक करके मीटिंग में जुड़ने तथा माईक चालू करने के दिशा निर्देश जरुर देखे |     ...

परिचय लेखक राकेश बिश्रोई

*नमस्ते* *नाम* -राकेश खिचङ बिश्रोई फताणी।  *प्रचलित नाम* -लेखक आर के विश्नोई ( *R.K.BISHNOI*).   *पिता*- श्रीमान पांचाराम जी ( Jvvnl jodhpur).  *माता*- मनोहरी देवी।   जन्म स्थान- भाखरी, जोधपुर राजस्थान ( ननिहाल) ।   *प्रेणास्रोत गुरु* 🙏🏻-।   *धार्मिक गुरु* -आचार्य सुदेवानन्द जी।  *आध्यात्मिक गुरु*- डां. राधेश्याम जी।   *रुचि* - लिखना, पढ़ना,भ्रमण करना साहित्यकारों से परिचय करना।   *आयु* - 16 वर्ष  *शिक्षा* - 12वीं (2020 में)।  *वर्तमान व्यवसाय* - कोई व्यवसाय नहीं केवल पढ़ना व लिखना।  *लेखन विधा* - *कहानी*, कविताएं, निबंध, लघुकथा,नाटक, जीवनी, आत्मकथा, डायरी । *प्रकाशन*- इन्दौर समाचार पत्र व दैनिक आधुनिक राजस्थान समाचार पत्र।  *कहानी*- 'अजब गांव की गजब कहानी', 'जितने मुंह उतनी बातं' आदि।   *निबंध* -स्मार्ट फोन की लत ।  *कविताएं*- 'रख तू ...

।। रख तू हौसला।।

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रख तू होसला...... रख तू उम्मीद पुरा होगा तेरा हर एक सपना . मत छोड़ो आसा तुम जरूर होंगे पास . मत हटना पीछे जाहें बाधा आये हजार .  मत होना निराश  हमेशा मुस्काराते तु रहना . जब  दुर्गम हो डगर तब मन में रख हौसला सुगम हो सफर ।। उभरता सितारा  कवि-राकेश विश्नोई विष्णु धोरा,लोहावट जोधपुर राजस्थान 8290039529

।।तेरी उम्मीद से सफलता तक।।

।।तेरी उम्मीद से सफलता तक।। ************* ये तेरी उम्मीद ही तो है जो आज भी तु लें खड़ा हैं दुनिया तो तुम्हें झुकाने पे खड़ी हैं तूं कलम ले डट के खड़ा है।। ।।यह तेरी कोशिश ही तो है।। झुकेगा नहीं यह पता है तु हठीला लगा मुझे  झुकाऐगा दुनिया ये मान अड़ा है हां अब दिख रही है सफलता तेरी।।   ।।यही तो तेरा हौसला है।। अच्छे अच्छे चोधरी भी डरे है झूठ की ओढ़ ले खड़े हैं।  तु आज तानाशाह पे  सच बोल उठा है तभी तो कुछ कांटे बन खड़े हैं।।     ।। यही तो तेरा लक्ष्य है।। तु लक्ष्य जरूर पायेगा , तानाशाही करने से पहले भय तेरा जरुर आएगा ,  यह मैं नहीं कहती है दुनिया।। ।।यही तो तेरी सफलता है।। लेखक राकेश बिश्रोई जोधपुर राजस्थान। 8290039529