।।तेरी उम्मीद से सफलता तक।।
।।तेरी उम्मीद से सफलता तक।।
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ये तेरी उम्मीद ही तो है
जो आज भी तु लें खड़ा हैं
दुनिया तो तुम्हें झुकाने पे खड़ी हैं
तूं कलम ले डट के खड़ा है।।
।।यह तेरी कोशिश ही तो है।।
झुकेगा नहीं यह पता है
तु हठीला लगा मुझे
झुकाऐगा दुनिया ये मान अड़ा है
हां अब दिख रही है सफलता तेरी।।
।।यही तो तेरा हौसला है।।
अच्छे अच्छे चोधरी भी डरे है
झूठ की ओढ़ ले खड़े हैं।
तु आज तानाशाह पे
सच बोल उठा है
तभी तो कुछ कांटे बन खड़े हैं।।
।। यही तो तेरा लक्ष्य है।।
तु लक्ष्य जरूर पायेगा ,
तानाशाही करने से पहले
भय तेरा जरुर आएगा ,
यह मैं नहीं कहती है दुनिया।।
।।यही तो तेरी सफलता है।।
लेखक राकेश बिश्रोई
जोधपुर राजस्थान।
8290039529
💖💗😍आभार 🙏
जवाब देंहटाएंVery very nice
जवाब देंहटाएंThanks 👍🤩
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